आदिवासी करमा नृत्य (अग्नेश केरकेट्टा)

छत्तीसगढ़ के वनवासी परिवार में जन्म | अग्नेश केरकेट्टा और उनका समूह करमा नृत्य की प्रस्तुति पिछले 20 वर्षो से कर रहें हैं | यह नृत्य गोंडवाना की लोक-संस्कृति का पर्याय है। करमा नाच, सतपुड़ा और विंध्य की पर्वत श्रेणियों के बीच दूर-दराज के गाँवों से लेकर छत्तीसगढ़, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, झारखंड और महाराष्ट्र के कई इलाकों तक प्रचलित है। सोनभद्र के गोंड और बैगा व कोरकू, खरवार और परधान जातियां करमा के ही कई रूपों में नाचती हैं। शादी या बच्चों के पैदा होने से लेकर नई फसल आने तक की खुशी में ये नाच किया जाता है, इसके अलावा दीपावली, रक्षा बंधन जैसे त्यौहारों की खुशी भी आदिवासी इलाकों में कर्मा नाच के साथ ही मनाई जाती है। भोपाल में उरांव जनजाति के अन्य पारंपरिक नृत्यों के साथ सक्रिय सुश्री अग्नेश केरकेट्टा ने करमा नृत्य की प्रस्तुतियों का एक पारंपरिक सिलसिला बरकरार रखा है।

स्वाती ऊखले (लोक कलाकार)

मालवा की मधुमय लोक संस्कृति की विरासत को संगीत-नृत्य में गहरे उत्तराधिकार के साथ संरक्षित करने वाली सुश्री स्वाती ऊखले लगभग ढ़ाई दशकों से सक्रिय है। मालवा की लोक नाट्य परंपरा माच के विख्यात कलाकार सिद्धेश्वर सेन तथा अपने पिता प्रेमकुमार सेन की प्रेरणा से स्वाती ने आंचलिक गीतों के संग्रह तथा उनके गायन के क्षेत्र में पूर्णकालिक तौर पर खुद को समर्पित किया। इस तारतम्य में मालवा के संस्कार गीत, ऋतु गीत, भक्ति पदों तथा अन्य दुर्लभ पारंपरिक गीतों की प्रस्तुतियों के साथ राष्ट्रीय मंचों पर दस्तक दी है। आकाशवाणी और दूरदर्शन की मान्य कलाकार है। इन दिनों नई पीढ़ी को मालवा के पारंपरिक नृत्य-गीतों का उज्जैन में प्रशिक्षण दे रही हैं।

तृप्ति नागर (लोक कलाकार)

धार्मिक-सांस्कृतिक नगरी उज्जैन में मालवा की लोक संपदा के संरक्षण और प्रचार के लिए अपनी सक्रिय भूमिका का निर्वाह करने वाली तृप्ति नागर ने व्यक्तिगत और सामूहिक निष्ठा से सार्वजनिक तौर पर सक्रियता का परिचय दिया है। संगीत में स्नातकोत्तर हैं तथा कई सांस्कृतिक संस्थाओं की मानद सदस्य है। मध्यप्रदेश शासन संस्कृति विभाग तथा भारत भवन सहित दिल्ली और अन्य शहरों में मालवा के पारंपरिक गीतों के गायन के लिए आमंत्रित की जाती रही है। 3 आकाशवाणी इंदौर की नियमित कलाकार हैं। उज्जैन में रहकर संगीत के शिक्षण-प्रशिक्षण के क्षेत्र में सक्रिय है।

शुभब्रत सेन (संगीतकार)

बंगाल की पृष्ठभूमि के शुभ ब्रत सेन प्रतिभाशाली संगीतकार और दक्ष दो तारा वादक हैं। बंगाल की संगीत परंपरा शुभ ब्रत सेन के संगीत के साथ नैसर्गिक रूप से आती है। वे पिछले कई सालों से ’दो तारा’ वाद्य के निर्माण और उसके प्रशिक्षण में संलग्न हैं। बांग्लादेश सहित देश के कई समारोहों में वे हिस्सेदारी कर चुके हैं। फिलहाल कोलकाता में निवास।

राहत इंदोरी, भारत

राहत इंदोरी एक भारतीय बॉलीवुड गीतकार और उर्दू भाषा के कवि हैं। वह उर्दू भाषा के पूर्व प्रोफेसर और चित्रकार भी हैं। इसके पहले वे इंदौर विश्वविद्यालय में उर्दू साहित्य के शिक्षाविद थे। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा नूतन स्कूल इंदौर से की। उन्होंने 1973 में इस्लामिया करीमिया कॉलेज इंदौर से स्नातक की पढ़ाई पूरी की और 1975 में बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय भोपाल (मध्य प्रदेश) से उर्दू साहित्य में एमए पास किया। राहत इंदोरी जी को 1985 में मध्य प्रदेश के भोज विश्वविद्यालय से उर्दू साहित्य में पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई। उनकी थीसिस का शीर्षक उर्दू मेन मुशायरा था।

इरशाद कामिल, भारत

इरशाद कामिल का जन्म 5 सितंबर 1971 को हुआ था। वह एक भारतीय कवि और गीतकार हैं। उनके गाने प्रसिद्ध बॉलीवुड फिल्मों जैसे जब वी मेट, चमेली, लव आज कल, रॉकस्टार, आशिकी 2, रांझणा, हाईवे, तमाशा और जब हैरी मेट सेजल मे शामिल हैं। इरशाद कामिल एक अच्छे गीतकार है ,उनकी सभी विधाओं पर कमांड है और उनका वर्डप्ले आसानी से जीवन, दर्शन, रोमांस, देशभक्ति, संवेदनशीलता और सूफीवाद के क्षेत्रों की यात्रा करता है। यह सरल शब्दों और गहरे विचारों का रंग है, जो उनके लेखन को चित्रित करता है। तीन फिल्मफेयर जीतने के अलावा, उन्हें स्क्रीन, आईफा, जी सिने, अप्सरा, जीआईएमए, मिर्ची म्यूजिक, बिग एंटरटेनमेंट और ग्लोबल इंडियन फिल्म एंड टेलीविजन अवार्ड से सम्मानित किया गया। इन्होने तमाशा, रॉकस्टार, रांझणा और सुल्तान आदि जैसी फिल्मों के लिए गीत लिखे है।

अज़ीज़ नबील, (कतर)

पूरा नाम : अज़ीज़ुर्रहमान मुहम्मद सिद्दीक अंसारी। 26 जून, 1976 को मुम्बई में जन्म। मुंबई, आजम गढ़ा और दिल्ली में जामिया मिलिया से पढ़ाई की। 1999 से अरब खाड़ी के देश कतर, 13 बहरीन और कुवैत में भारतीय साहित्य, सभ्यता और भाषा के प्रचार के लिए काम। प्रकाशन: खाब समुद्र (शायरी 2011), आवाज़ के पर खुलते हैं (शायरी – 2019), पहली बारिश (शायरी – 2019), फिराक गोरखपुरी (शख्सियत, शायरी और शनाख्त – 2014), इरफान सिद्दीकी (हयात, ख़िदमात और शे’री कायनात – 2015), पंडित आनंद नारायण मुल्ला (शख्सियत और फन–2016); पंडित बृज नारायण चकबस्त (2018), किताबी सिलसिला दस्तावेज़ (सम्पादन – 2010 से अब तक)। साहिर लुधियानवी अवार्ड, ‘फ़िराक गोरखपुरी अवार्ड’, ‘अब्दुल गफूर शहबाज़ अवार्ड, आदि।

वसीम बरेलवी, (उत्तर प्रदेश, भारत)

मूल नाम ज़ाहिद हसन। वसीम बरेलवी एक प्रसिद्ध उर्दू शायर हैं जो बरेली (उत्तर प्रदेश) के रहने वाले हैं। इनका जन्म 8 फरवरी 1940 को हुआ। इन्होंने आगरा विश्वविद्यालय से उर्दू में परास्नातक किया। बरेली कॉलेज, बरेली (रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय) में उर्दू विभाग में प्रोफेसर रहे। कुछ प्रमुख कृतियाँ – आँखों आँखों रहे, मौसम अन्दर-बाहर के, तबस्सुमे-ग़म, आँसू मेरे दामन तेरा, मिजाज़, मेरा क्या।

नुसरत मेहदी, मध्य प्रदेश, भारत

शायरी, कहानी लेखन, आलेख, ड्रामा और स्क्रिप्ट लेखन में गहन रुचि रखने वाली शायरा। गद्य और पद्य दोनों में विपुल और सार्थक लेखन। हिन्दी और अंग्रेजी में स्नातकोत्तर। लन्दन से मानद उपाधि। मध्य प्रदेश उर्दू अकादमी, संस्कृति विभाग के सचिव और अल्लामा इक़बाल अदबी मरकज़ के उपनिदेशक समेत अनेक महत्वूपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएँ। अन्तरराष्ट्रीय सेमिनारों, उर्दू सम्मेलनों, कार्यशालाओं, मुशायरों में सक्रिय व निरन्तर सहभागिता। अमेरिका, इंग्लैंड, दुबई, सऊदी अरब, पाकिस्तान, बहरीन, क़तर, कुवैत, मस्कट आदि देशों की साहित्यिक यात्राएँ। काव्य कृतियाँ - साया साया धूप, बला पा, मैं भी तो हूँ (देवनागरी), घर आने को है, 11 हिसारे ज़ात से परे, फ़रहाद नहीं होने के (देवनागरी)। गद्य कृतियाँ - 1857 की जंगे आज़ादी, इंतेख़ाब ए सुख़न, इस्लाम में नैतिक मूल्य अन्तर्राष्ट्रीय सम्मान व पुरस्कार - हुस्न ए कारकरदिगी उर्दू इण्टरनेशनल अवॉर्ड, उर्दू मरकज़ इण्टरनेशनल, मोस्ट प्रोमिज़िंग उर्दू पोएटेस एण्ड राइटर इन इण्डिया अवार्ड, ग्लोबल लिटरेरी अवॉर्ड। राष्ट्रीय सम्मान व पुरस्कार - आनन्दा सम्मान, सुमिरन गीत सम्मान, अभिनव शब्द शिल्पी सम्मान, सृजन कला प्रेरक सम्मान, मदर टेरेसा गोल्ड मेडल, नुशूर अवार्ड, ख़ातून ए अवध अवार्ड। सम्प्रति - डिप्टी डायरेक्टर, अध्यात्म विभाग, मध्य प्रदेश।

परवीन कैफ, मध्य प्रदेश, भारत

परवीन कैफ का जन्म 23 दिसम्बर 1956 को हुआ। इन्होंने उर्दू में परास्नातक और पीएच.डी. की उपाधि हासिल की है। ये पिछले चार दशकों से उर्दू शायरी और हिन्दी कविता रचने में संलग्न हैं। सन् 2013 में प्रकाशित आपकी पुस्तक ‘सफर एक उम्र का’ बेहद चर्चित रही है। डेढ़ सौ से अधिक राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय मुशायरों में शिरकत। अनेक लोकप्रिय पत्रिकाओं में इनके अनेक लेख प्रकाशित हैं। पुरस्कार और सम्मान – समता प्रतिभा सम्मान (1995), राष्ट्रीय हिन्दी सेवी सहस्राब्दी सम्मान (2000), नर्मदा आँचल सम्मान (2010), इस्लामिक स्टडीज़ एसोसिएशन अवार्ड (2011), कहकशाने-अदब सम्मान (2013), शिफा ग्वालियरी सूबाई अवार्ड (2012-13), अखिल भारतीय भाषा साहित्य सम्मेलन भोपाल का नेशनल अवार्ड (2016), हामिद हसन शाद अवार्ड (2018) समेत अनेक सम्मान। ये मध्य प्रदेश की उर्दू अकादमी (भोपाल) और मध्य प्रदेश जनवादी लेखक संघ की सदस्य हैं।

सुखन

सुखन पुणे में स्थित समकालीन बैंड है। यह महफ़िल सुलखान, उर्दू ग़ज़लों और नज़्मों को प्रस्तुत करता है, जिसमें गद्य तत्वों को कहानियों और पत्रों की तरह सम्मिलित किया जाता है, जिससे विविध दर्शकों को प्रारूप समझने में आसानी होती है।

रघु दीक्षित प्रोजेक्ट

रघु दीक्षित प्रोजेक्ट ' इस समय भारत में सबसे अधिक मांग वाले बैंडों में से एक है। यह बैंड अब दुनिया भर के कुछ सबसे बड़े संगीत समारोहों में प्रमुखता से और नियमित रूप से शामिल है। रघु दीक्षित प्रोजेक्ट बैंड सर्वाधिक प्रसिद्ध हैं , प्राचीन कन्नड़ कविता और समकालीन, वैश्विक ध्वनि के साथ इसे दुनिया भर में पेश किया जाता है । अपनी रंगीन लुंगी से अपनी सांस्कृतिक विरासत परअपनी जड़ें और मिट्टी की आवाज़ से, ये आधुनिक भारत का एक शानदार उदाहरण बन गए हैं। भारत में रघु दीक्षित प्रोजेक्ट बैंड संगीत समारोहों, कॉलेज, त्योहारों और निजी कार्यक्रमों में अपनी प्रस्तुति देता है