टैगोर अंतर्राष्ट्रीय साहित्य एवं कला महोत्सव 'विश्वरंग'

साहित्य, संस्कृति और कलाओं की सृजनशील दुनिया को अपने समय में देखने-परखने और उसके प्रति रूचि, जिज्ञासा और उद्वेलन का नया परिवेश रचने की उत्सवी आकांक्षा है- ‘विश्वरंग’। उन सरोकारों से जुड़ने की मंशा, जो अभिव्यक्ति के विभिन्न माध्यमों में मानवीय जीवन और जगत का बहुरंगी फ़लक रचती रही है। इसी ज़मीन पर अफ़सानों, बहस-मुबाहिसों तथा अदब और तहज़ीब की रंगो-महक के बेमिसाल सिलसिलों का एक दिलचस्प मंज़र रोशन हो रहा है। ताल-तलैयों और शैल-शिखरों के सुरम्य शहर भोपाल में ‘विश्वरंग’ का ताना-बाना 4 से 10 नवंबर 2019 तक सजेगा। यह हिन्दी और भारतीय भाषाओं के बीच वैचारिक संवाद तथा सांस्कृतिक आपसदारी का विराट समागम होगा। रवीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, भोपाल की पहल पर टैगोर विश्व कला एवं संस्कृति केन्द्र तथा वनमाली सृजन पीठ के मुख्य संयोजन में परिकल्पित इस अंतर्राष्ट्रीय साहित्य तथा कला महोत्सव में भारत सहित दुनिया के तीस देशों के पाँच सौ से भी अधिक प्रतिनिधि-हस्ताक्षर शिरकत करेंगे। लगभग पचास सत्रों के आसपास संयोजित यह विश्व कुंभ साहित्य, संस्कृति, शिक्षा, सिनेमा, पत्रकारिता, पर्यावरण सहित अनेक विषयों का अनूठा मंच होगा। भोपाल में ‘विश्वरंग‘ की गतिविधियाँ मिंटो हाल, भारत भवन तथा रवीन्द्र भवन में हांगी। भारत के किसी भी शैक्षणिक संस्थान की पहल पर होने वाला यह पहला विश्व स्तरीय साहित्य-कला महोत्सव है। टैगोर विश्वविद्यालय इस दृष्टि से एक और कीर्तिमान रच रहा है।