डॉ. कमल किशोर गोयनका (भारत)

देश-विदेश में 'प्रेमचंद स्कॉलर' और 'प्रेमचंद विशेषज्ञ' के रूप में विख्यात। प्रेमचंद पर 22 पुस्तकें तथा अन्य लेखकों पर 20 पुस्तकें प्रकाशित। 'प्रेमचंद अकादमी' तथा 'प्रेमचंद संग्रहालय' की स्थापना के लिए प्रयत्नशील तथा लगभग 3000 मूल दस्तावेजों, पत्रों, पाण्डुलिपियों, फोटोग्रॉफों का संग्रह करने वाले, हिंदी के प्रवासी साहित्य की स्थापना, मूल्यांकन के लिए तीन दशकों से कार्यरत। प्रवासी साहित्य पर छह पुस्तकें। प्रवासी साहित्य के तीन प्रतिनिधि संकलनों का सम्पादन-प्रकाशन। अपनी अस्मिता की रक्षा के साथ विश्व को एक कुटुम्ब मानने वाले भारत के एकमात्र ऐसे स्कॉलर जिन्होंने प्रेमचंद पर पीएच.डी. तथा डी.लिट् दोनों उपाधियाँ प्राप्त कीं। सम्प्रति - उपाध्याक्ष, केन्द्रीय हिंदी संस्थान, आगरा।

डॉ. कविता वाचक्नवी (अमेरिका)

6 फरवरी, 1963 को अमृतसर में जन्म। हिंदी (भाषा एवं साहित्य) में एम.ए.। प्रभाकर-- हिन्दी साहित्य एवं भाषा। एम.फिल., पीएच.डी। कविता, गीत, कहानी, शोध, पचास से अधिक पुस्तकों की समीक्षाएँ। संस्मरण, ललित निबंध, साक्षात्कार तथा रिपोर्ताज आदि विधाओं में देशभर की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर लेखन. विभिन्न सामाजिक संस्थाओं से सक्रिय तौर पर जुड़ी हैं. महात्मा गांधी अन्तर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय एवम् उच्च शिक्षा और शोध संस्थान, विश्वविद्यालय विभाग, दक्षिण भारत हिन्दी प्रचार सभा में अतिथि अध्यापक के रूप में अंशकालिक अध्यापन। सम्प्रति- अमेरिका में निवास।

रेखा मैत्र (अमेरिका)

बनारस में जन्म। सागर विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में एम.ए.। मुंबई विवि से टीचर्स ट्रेनिंग में डिप्लोमा। अमरीका में बसने के बाद गवर्नेस स्टेट यूनिवर्सिटी से ट्रेनिंग कोर्स किए। मलेशिया भी रहीं। अमरीका में हिंदी के प्रचार-प्रसार से जुड़ी संस्था 'उन्मेष' से जुड़ी हैं. प्रकाशित कविता संग्रह : पलों की परछाइयाँ, मन की गली, उस पार, रिश्तों की पगडंडियाँ, मुट्ठी पर धूप, बेशर्म के फूल, ढाई आखर, बेनाम रिश्ते, यादों का इन्द्रधनुष तथा साँझ के साए। कविताओं का बंग्ला और अंग्रेजी में अनुवाद। अमेरिका के हिंदी कवियों की प्रकाशित पुस्तक 'मेरा दावा है' और 'प्रवासिनी के बोल' में भी रचनाएँ सम्मिलित। सम्प्रति - अमेरिका में निवास।

प्रो. डॉ. पुष्पिता अवस्थी (नीदरलैंड)

कानपुर में जन्म। पढ़ाई राजघाट, वाराणसी के प्रतिष्ठित जे. कृष्णमूर्ति फाउण्डेशन में हुई। 1984 से 2001 तक वसंत कॉलेज फ़ॉर विमैन के हिन्दी विभाग की अध्यक्ष रहीं। सूरीनाम में आयोजित सातवें विश्व हिन्दी सम्मेलन की संयोजक। तीन दर्जन से अधिक पुस्तकें प्रकाशित। विभिन्न साहित्यिक विभूतियों पर डॉक्यूमेंटरी फिल्मों का निर्माण। जापान, मॉरिशस, अमेरिका, इंग्लैंड सहित अनेक यूरोपीय और कैरिबियन देशों में काव्य-पाठ। सम्प्रति - नीदरलैंड स्थित 'हिन्दी यूनिवर्स फाउंडेशन' की निदेशक।

जय वर्मा (ब्रिटेन)

1950 को जिवाना, मेरठ में जन्मी सुश्री जय वर्मा ने बी.ए., बी.टैक, एडवांस डिप्लोमा प्रैक्टिस मैनेजमेंट, पोस्ट ग्रेजुएट सर्टिफिकेट तथा सर्विस मैनेजमेंट आदि उपाधियाँ प्राप्त कीं। आप ब्रिटेन की प्रमुख हिन्दीसेवी हैं। अनेक साहित्यिक संस्थाओं की संस्थापक एवं सदस्य हैं। कलर्स ऑफ पोइट्री के अलावा कविता-संग्रह हसहयात्री हैं हममप्रकाशित। लैंग्वेज सेण्टर में हिन्दी पाठ्यक्रम की 30 बाल कहानियाँ अंग्रेजी पुस्तकों का हिन्दी अनुवाद प्रकाशित। अनेक विश्व हिंदी सम्मेलनों में शिरकत। डेढ़ दर्जन से अधिक पुरस्कारों से सम्मानित। सम्प्रति - नाटिंघम, ब्रिटेन में निवास।

संजय अग्निहोत्री क्षितिज (आस्ट्रेलिया)

रायबरेली, उ.प्र. में जन्म। रीजनल इंजीनियरिंग कॉलेज, जमशेद्पुर से यांत्रिक अभियंत्रण में स्नातक। यूनिवर्सिटी आफ़ न्यू साउथ वेल्स से कम्प्यूटर के क्षेत्र में स्नात्कोत्तर अध्ययन। कुछ साल उत्तरप्रदेश सहकारी चीनी मिल संगठन मे सहायक अभियंता के पद पर कार्य किया। उपन्यास जो दिल की तमन्ना है प्रकाशित। कविताएँ विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित। सम्प्रति - न्यू साउथ वेल्स राज्य सरकार, ऑस्ट्रेलिया के यातायात विभाग मे अभियन्ता ।

उमेश ताम्बी (अमेरिका)

जन्म, नागपुर के समीप तुमसर शहर में उद्योगी परिवार में हुआ। नागपुर विश्वविद्यालय से 1987 की प्रावीण्य सूची में अभियांत्रिकी स्नातक में प्रथम स्थान पाया। 1989 में एडमिनिस्ट्रेशन में स्नातकोत्तर। 1999 तक स्वयं के उद्योग-व्यवसाय में भारत में सफलता पाने के बाद अमेरिका पहुँचे। साफ्टवेयर के क्षेत्र में कार्यरत। फिलाडेल्फिया के पास परिवार के साथ रहते हैं। हिंदी भाषा के प्रति अटूट प्रेम, बचपन से ही हास्य और व्यंग्य कविताओं के प्रति रुचि रही है। कुछ समय से अनुभव और विचारों को साहित्य और काव्य का रूप देने का प्रयास शुरू किया है। सम्प्रति - फिलाडेल्फिया, यू.एस.ए. निवास।

अशोक सिंह (अमेरिका)

22 अगस्त को उन्नाव, उत्तरप्रदेश में जन्म। आई.आई.टी. रुड़की से बैचलर ऑफ आर्किटेक्चर तथा न्यूयॉर्क इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नालॉजी से कम्प्यूटर साइंस में एम.एस. की उपाधि प्राप्त की। कविता-संग्रह 'फिर वसन्त आये' प्रकाशित। अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी समिति, अमेरिका के भूतपूर्व निदेशक व त्रैमासिक पत्रिका ई-विश्वा के सह-सम्पादक। ब्लॉग 'ई-काव्य' तथा न्यूयार्क शहर में आयोजित 'तरंग' काव्य-गोष्ठी के संस्थापक। सम्प्रति - आईबीएम में वरिष्ठ सूचना प्रौद्योगिकी पद पर कार्यरत तथा न्यूयॉर्क में निवास।

--

डॉ. भावना कुँअर (आस्ट्रेलिया)

हिन्दी व संस्कृत में स्नातकोत्तर उपाधि। हिन्‍दी में पीएच.डी. टेक्सटाइल डिजाइनिंग, फैशन डिजाइनिंग में डिप्लोमा। तारों की चूनर (हाइकु संग्रह) एवं ‘साठोत्तरी हिन्दी गज़ल’ में विद्रोह के स्वर पुस्तकें प्रकाशित। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में कविता, कहानी, गीत, हाइकु, बालगीत, लेख, पुस्तक-समीक्षायें प्रकाशित। सम्मान : 'हाइकु रत्न सम्मान' महेन्द्रू पटना से सम्मानित. संप्रति : सिडनी यूनिवसिर्टी में अध्यापन।

डॉ. रामा तक्षक (नीदरलैंड)

1962 में गाँव जाट बहरोड़, जिला अलवर, राजस्थान में जन्म। हिन्दी साहित्य में स्नातकोत्तर तथा हर्बल मेडिसिन में डॉक्टरेट की उपाधियाँ प्राप्त कीं। कविताएं, कहानी और डायरी लिखते हैं। अनेक संगोष्ठियों, सेमिनारों में शिरकत की तथा विभिन्न साहित्यिक, सामाजिक मंच पर सक्रिय। रचनाएँ अनेक पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित। सम्प्रति - विलनिस, दि नीदरलैंड में व्यवसायरत।

अनिल शर्मा (फिजी, दिल्‍ली)

प्रख्यात कवि, व्यंग्यकार, लेखक, चिंतक तथा प्रवासी साहित्य के विशेषज्ञ। लंदन विश्वविद्यालय से ट्रांसलेशन स्टडी तथा हिंदी में एम.ए., राजस्थान विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म तथा दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.कॉम.। भारतीय उच्चायोग लंदन में अताशे (हिंदी एवं संस्कृति) के रूप में कार्य किया। केंद्रीय अनुवाद ब्यूरो में तीन दशकों तक कार्य किया। कविता संग्रह - 'मोर्चे पर', 'नींद कहां है' प्रकाशित। ब्रिटेन के कवियों का संकलन 'धरती एक पुल' का सम्पादन। हिंदी की अंतर्राष्ट्रीय संस्था अक्षरम से अध्यक्ष के तौर पर जुड़े रहे। वातायन, यू.के. हिंदी समिति, विश्व हिंदी समिति, विश्व हिंदी परिषद तथा विश्व हिंदी न्यास द्वारा सम्मानित। निदेशक, भारतीय संस्कृति केंद्र, चांसरी प्रमुख, द्वितीय सचिव, हिंदी, भारतीय उच्चायोग, सुवा, फीजी रहे। सम्प्रति - दिल्ली में निवास।

डॉ, सुषम बेदी (न्‍यूयॉर्क, अमेरिका)

1 जुलाई 1945 को फीरोजपुर, पंजाब में जन्म। इंद्रप्रस्थ कॉलेज, दिल्ली से बी.ए., एम.ए., दिल्ली यूनिवर्सिटी से एम.फिल तथा पंजाब यूनिवर्सिटी से पीएच.डी. की उपाधि। हिन्दी की प्रख्यात साहित्यकार। प्रमुख कृतियाँ : उपन्यास : हवन, लौटना, नव भूम की रसकथा, गाथा अमरबेल की, कतरा दर कतरा, इतर, मैंने नाता तोड़ा तथा मोर्चे। कहानी संग्रह : चिड़िया और चील, सुषम बेदी की यादगार कहानियाँ तथा तीसरी आँख। शोधग्रंथ : हिंदी नाट्य प्रयोग के संदर्भ में, हिंदी भाषा का भूमंडलीकरण तथा आरोह-अवरोह। सम्प्रति - कोलंबिया विश्व विद्यालय, न्यूयार्क में हिंदी भाषा और साहित्य की प्रोफेसर हैं।

अर्चना पैन्यूली (डेनमार्क)

17 मई 1963 को कानपुर में जन्म। गढ़वाल विश्वविद्यालय, देहरादून से एम.एस-सी.। पचास से अधिक कहानी, लेख, कवितायें व साक्षात्कार प्रकाशित। 'परिवर्तन' एवं 'वेयर डू आई बिलांग' उपन्यास प्रकाशित। साहित्यिक संस्था, महिला मंच, देहरादून ने साहित्य में योगदान के लिये सम्मानित किया। इंडियन कल्चरल एसोसियेशन कोपनहेगन ने प्रेमचन्द पुरस्कार से सम्मनित किया। इंडियन कल्चरल सोसाइटी, डेनमार्क द्वारा 'प्राइड आफ इंडिया' सम्मान से सम्मानित। राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त मैमोरियल ट्रस्ट द्वारा राष्ट्रकवि प्रवासी साहित्यकार पुरस्कार से सम्मानित। डेनमार्क आने से पूर्व मुंबई में लगभग नौ वर्षों तक शिक्षण कार्य। सम्प्रति - एन.एन.जी. इंटरनेशनल स्कूल में अध्यापन।

---

उषा राजे सक्सेना (इंग्‍लैंड)

इंग्लैंड में प्रवासी भारतीय के रूप में जानी मानी लेखिका। रचनाएँ विभिन्न भारतीय भाषाओं में अनूदित एवं जापान के ओसाका वि.वि. के पाठ्यक्रम में भी शामिल। ब्रिटेन की हिंदी साहित्यिक त्रैमासिक पत्रिका पुरवाई की सह-संपादिका तथा हिंदी समिति यूके की उपाध्यक्ष हैं। तीन दशकों तक ब्रिटेन के बॉरो ऑॅफ मर्टन की शैक्षिक संस्थाओं में विभिन्न पदों पर कार्यरत रहीं। प्रमुख कृतियाँ- काव्य-संग्रह : विश्वास की रजत सीपियाँ, इंद्रधनुष की तलाश में। कहानी संग्रह : प्रवास में, वॉकिंग पार्टनर। देश-विदेश की अनेक पुरस्कारों से सम्मानित। सम्प्रति - लंदन में निवास।

रेखा राजवंशी (आस्ट्रेलिया)

भारत में जन्म। हिंदी, अंग्रेजी और संस्कृत विषय में स्नातक की उपाधि प्राप्त की। बीएड तथा दिल्ली विश्वविद्यालय से शिक्षा में स्नातकोत्तर (एमएड)। मैक्वेरी विश्वविद्यालय, ऑस्ट्रेलिया से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन स्पेशल एजुकेशन। भाषा शिक्षण, व्यावसायिक कार्यशालाओं और पाठ्यक्रमों में भाग लिया। प्रकाशित पुस्तकें : ऑस्ट्रेलिया के कवियों के दो काव्य संकलन 'बूमरैंग' तथा हिंदी और उर्दू में 51 ग़ज़लों की एक पुस्तक 'मुट्ठी भर चांदनी'। 'कंगारुओं के देश में', 'छोटे-छोटे पंख', 'ये गलियों के बच्चे' तथा 'अनुभूति के गुलमोहर'। सम्प्रति - गैर-हिंदीभाषी ऑस्ट्रेलियाई वयस्कों को हिंदी पढ़ाती हैं तथा सिडनी में निवास।

डॉ. वंदना मुकेश (इंग्‍लैंड)

12 सितंबर 1969 को भोपाल में जन्म। विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन से स्नातक, पुणे विद्यापीठ से अंग्रेज़ी व हिंदी में प्रथम श्रेणी से स्नातकोत्तर एवं हिंदी में पीएचडी की उपाधि। इंग्लैंड से क्वालिफ़ाईड टीचर स्टेटस। साप्ताहिक हिंदुस्तान में पहली कविता खामोश ज़िंदगी प्रकाशित। भारत एवं इंग्लैंड में अनेक राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय शोध संगोष्ठियों में प्रपत्र वाचन, सहभाग और सम्मान। इंटीग्रेटेड काउंसिल फ़ॉर सोयो-इकनॉमिक प्रोग्रेस दिल्ली द्वारा महिला राष्ट्रीय ज्योति पुरस्कार. संप्रति : इंग्लैंड में अध्यापन एवं स्वतंत्र लेखन.

डॉ. संध्या सिंह (सिंगापुर)

हिंदी साहित्य में एम.ए., बीएड और सिंगापुर में हिंदी और भोजपुरी विषय में पीएचडी। हिंदी सोसाइटी सिंगापुर के मार्फ़त स्वयंसेवी के रूप में हिंदी शिक्षण की शुरुआत, सिंगापुर के एनपीएस अंतर्राष्ट्रीय पाठशाला में आधुनिक भाषाओं की विभागाध्यक्षा के पद पर कार्य किया। नान्यांग तेक्नोलोज़िकल यूनिवर्सिटी में हिंदी प्रवक्ता एवं समन्वयक के पद पर कार्य किया। वर्तमान में नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ़ सिंगापुर में हिंदी समन्वयक और प्रवक्ता हैं। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में आलेख प्रकाशित।

धर्मपाल महेंद्र जैन (कैनेडा)

1952 को रानापुर, जिला झाबुआ, म.प्र. में जन्म। भौतिकी, हिन्दी एवं अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर। व्यंग्य संकलन 'सर क्यों दाँत फाड़ रहा है?' तथा तीन सौ से अधिक कविताएँ व हास्य-व्यंग्य विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित। रचनाएँ आकाशवाणी से भी प्रसारित। स्वदेश दैनिक, इन्दौर तथा शाश्वत धर्म मासिक समाचार-पत्रों से सम्बद्ध रहे। जैन सोसायटी ऑफ टोरंटो, कैनेडा की मिनिस्ट्री ऑफ करेक्शंस के तहत आयएफसी में पूर्व निदेशक रहे। भारतीय कौंसलावास, न्यूयॉर्क की राजभाषा समिति और परमानेंट मिशन ऑफ इंडिया की सांस्कृतिक समिति में सदस्य तथा इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकर्स संस्थाओं से जुड़े रहे हैं। संप्रति : सेवानिवृत्त, स्वतंत्र लेखन। दीपट्रांस में कार्यपालक। टोरंटो, कनाडा में निवास।

दिव्या माथुर (इंग्‍लैंड)

अंतर्राष्ट्रीय वातायन कविता संस्था की संस्थापक अध्यक्ष और रौयल सोसाइटी ऑफ़ आर्ट्स की फ़ेलो। सात कविता-संग्रह, पांच कहानी संग्रह प्रकाशित। पांच कहानी-संग्रहों का अंग्रेज़ी में सम्पादन। मंत्रा-लिंगुआ के लिए बच्चों की पांच पुस्तकों का अनुवाद किया। उपन्यास, शाम भर बातें, दिल्ली विश्विद्यालय के बीए-औनर्स पाठ्यक्रम में शामिल। रचनाओं पर स्नातकोत्तर शोध हो चुके हैं। नाटक फ्यूचर-परफैक्टर्, एवं ‘ठुल्ला किलब’ का सफल मंचन। कहानी सांप-सीढी पर टेली-फ़िल्म निर्मित। दो दशकों तक नेहरु केंद्र, लन्दन में वरिष्ठ कार्यक्रम अधिकारी रहीं। आर्ट्स काउन्सिल औफ़ इंग्लैंड के 'आर्ट्स एचीवर' सम्मान, भारत सम्मान-2010, डॉ. हरिवंश राय बच्चन लेखन सम्मान, राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त प्रवासी भारतीय पुरस्कार-2010 तथा परमानंद साहित्य एवं संस्कृति सेवा सम्मान से पुरस्कृत। सम्प्रति - लंदन में निवास।

रमेश जोशी (अमेरिका)

18 अगस्त 1942 को चिड़ावा, राजस्थान में जन्म। राजस्थान विश्वविद्यालय से एम.ए. और रीजनल कालेज ऑॅफ एज्यूकेशन भोपाल से बी.एड., पोरबंदर से पोर्ट ब्लेयर तक घुमक्कड़ी। प्राथमिक शिक्षण से प्राध्यापकी करते हुए केन्द्रीय विद्यालय जयपुर से सेवानिवृत्त। संप्रति : अमरीका में अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति की त्रैमासिक पत्रिका 'विश्वा' के प्रधान संपादक। मूलत: व्यंग्यकार, गद्य-पद्य की 12 पुस्तकें प्रकाशित।

तेजेन्द्र शर्मा (लंदन, इंग्‍लैंड)

21 अक्टूबर 1952 को जगरांव, पंजाब में जन्म। दिल्ली विवि से अंग्रेजी में एमए और कंप्यूटर साइंस में डिप्लोमा। दूरदर्शन के लिये ‘शांति’ सीरियल का लेखन। फिल्म ‘अभयद्’ में नाना पाटेकर के साथ अभिनय। प्रमुख कृतियाँ : कहानी संग्रह : काला सागर, ढिबरी टाईट, देह की कीमत, यह क्या हो गया!, बेघर आँखें, सीधी रेखा की परतें, कब्र का मुनाफा तथा दीवार में रास्ता। कविता संग्रह : ये घर तुम्हारा है, मैं कवि हूँ इस देश का। महाराष्ट्र राज्य साहित्य अकादमी पुरस्कार, केंद्रीय हिंदी संस्थान का मोटरी सत्यनारायण सम्मान, उत्तरप्रदेश हिंदी संस्थान का प्रवासी साहित्य भूषण सम्मान, हरियाणा साहित्य अकादमी का प्रवासी साहित्यकार सम्मान, भारतीय उच्चायोग, लंदन का हरिवंशराय बच्चन सम्मान से सम्मानित। सम्प्रति - लंदन में निवास।

ललित मोहन जोशी (इंग्‍लैंड)

लन्दन स्थित फिल्म इतिहासकार, डाक्यूमेंट्री फ़िल्मकार, लेखक, कवि और समीक्षक। दो दशकों (1988-2008) तक बीबीसी (लन्दन) हिंदी सेवा में प्रसारक पत्रकार रहे। बीबीसी टेलीविज़न में बॉलीवुड और बस्ट (1993) के प्रोड्यूसर और कई वृत्त चित्रों का सह-निर्माण। द गार्डियन, द इंडिपेंडेंट (लन्दन), इंडिया टुडे (भारत) में लेखन। वर्ष 2000 में स्थापित साउथ एशियन सिनेमा फ़ाउन्डेशन (एसऐसीएफ), लंदन के संस्थापक निदेशक और साउथ एशियन सिनेमा पत्र के संस्थापक संपादक। बॉलीवुड - पॉपुलर इंडियन सिनेमा, अ डोर टु अडूर, निरंजन पाल अ फॉरगॉटन लेजेंड और अ बायोग्रेफिकल डिक्शनरी ऑफ़ इन्डो-ब्रिटिश सिनेमा पुस्तकों के लेखक व सहलेखक। तीन नाटकों - गोपिये हरूलि (कुमाऊँनी), अन्तर्द्वन्द (हिन्दी) और योर्स कृष्णामेनन (अंग्रेज़ी) का लेखन व निर्देशन। एसऐसीएफ के लिए तीन डॉक्युमेन्ट्री फ़िल्मों - 'बियॉन्ड पारटिशन' (2006), 'निरंजन पाल अ फॉरगॉटन लेजेंड' (2012) और 'ईस्ट मीट्स वेस्ट - एन इन्डो-ब्रिटिश सिनेमैटिक इनकॉउन्टर्स' (2015) का निर्देशन।