डॉ. हाइंस वेर्नर वेसलर, उपसला, डेनमार्क

1962 में जर्मनी के डसलडर्फ़ शहर में जन्म। बॉन विश्वविद्यालय से एम.ए. तथा डीलिट, स्विटजरलैंड के सूटिश विश्वविद्यालय से संस्कृत में पीएचडी की उपाधि प्राप्ति की। कुछ समय तक पत्रकारिता में भी सक्रिय रहे एवं अंतर्राष्ट्रीय रेडक्रॉस सोसायटी के लिये भी काम किया। हबीब तनवीर के नाटक 'आगरा बाजार' एवं उदयप्रकाश का उपन्यास 'पीली छतरी वाली लड़की' का जर्मन में अनुवाद प्रकाशित। विश्व हिंदी सम्मान-2015 से सम्मानित। सम्प्रति : उपसला विश्वविद्यालय, स्वीडन में हिन्दी पढ़ाते हैं।

डॉ इंदिरा गाजीएवा, मास्को

उज़बेकिस्तान के ताशकन्द शहर में जन्म। तीन साल की उम्र में माता-पिता के साथ पोवाई विश्वविद्यालय, मुंबई आ गईं, जहाँ वे रूसी भाषा पढ़ाते थे। सन् 1979-84 में ताशकन्द विश्वविद्यालय के पूर्वी विभाग से एम.ए. एवं 1985-88 में संस्कृत अनुसंधान कार्य किया। 1994-2000 में मास्को विश्वविद्यालय में हिन्दी की अध्यापिका रहीं। 2001 से 2003 तक मास्को 19वीं बोर्डिंग स्कूल में भी हिन्दी पढ़ाई। हिन्दी पढ़ाने के दौरान रूसी भाषा में कई पाठ्य-पुस्तकें एवं व्याकरण की पुस्तकें लिखीं। दो साल पहले दर्शनशास्त्र विश्वविद्यालय में पूर्वी विभाग खोला गया जहां रूसी छात्र हिन्दी, संस्कृत, दर्शनशास्त्र आदि विषय सीखते हैं। सम्प्रति : रूस राजकीय मानविकी विवि की हिन्दी अध्यापिका।

डॉ, मिकि निशिओका, जापान

ओसाका विश्वविद्यालय की एसोसिएट प्रोफेसर। विदेशी अध्ययन संकाय में हिंदी व हिंदी भाषाविज्ञान की प्राध्‍यापिका। मुख्य अध्ययन विषय है- हिंदी और जापानी का तुलनात्मक भाषाविज्ञान। सम्प्रति - ओसाका विश्वविद्यालय की एसोसिएट प्रोफेसर।

डॉ. एसरा कोक्देमिर, टर्की

अंकारा विश्वविद्यालय से मास्टर ऑफ़ फ़िलॉसफ़ी तथा पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। हैदराबाद विश्वविद्यालय, से भारतीय भाषा और साहित्य उपाधि। ‘भारतीय महाकाव्य रामायण’ , ‘शास्त्रीय भारतीय साहित्य में महासागर के हिलने की किंवदंती: संस्कृति और साहित्य की समीक्षा’, ‘भारत में गुप्त साम्राज्य काल के नमूने से शुरू: कला और इतिहास का तुलनात्मक मूल्यांकनद्’ , ‘भारतीय अग्नि देव अग्नि का गठन’ तथा ‘भारत में शिक्षा प्रणाली पर जाति व्यवस्था का प्रभावद्’ जैसे विभिन्न विषयों पर आलेख लिखें। सम्प्रति - 2014 से वर्तमान तक हिन्दी शिक्षण विभाग, भाषा, इतिहास और भूगोल संकाय, अंकारा विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर।

डॉ. यूरी बोत्वींकिन, यूक्रेन

1995-2000 में कीव राष्ट्रीय विश्वविद्यालय में हिंदी, अंग्रेज़ी एवं उर्दू की पढ़ाई की। ICCR के छात्रवृत्ति-कार्यक्रम के अंतर्गत 1998-1999 में केंद्रीय हिंदी संस्थान में (दिल्ली शाखा) हिंदी में डिप्लोमा कोर्स किया और 2002-2004 में जीवाजी विश्वविद्यालय में (ग्वालियर) इतिहास में M.A. किया। युक्रैन में लौटकर 2006 से कीव राष्ट्रीय विश्वविद्यालय में हिंदी तथा हिंदी साहित्य पढ़ा रहा हूँ। 2007 में विश्व इतिहास में Ph.D. किया जिसका विषय था “14-18वीं सदियों में उत्तर भारत में भक्ति अंदोलन का विकास”. 2016 में युक्रैन की प्रसिद्ध कवियत्रि लेस्या उक्राईंका के काव्य “वन-गीत” का हिंदी में अनुवाद करके प्रकाशित किया। 2018 में मॉरीशस में 11वें विश्व हिंदी सम्मेलन में भाग लिया। सम्प्रति- हिंदी प्राध्यापक, कीव राष्ट्रीय विश्वविद्यालय, यूक्रेन।

डॉ. सिराजूद्दीन नुर्मातोव, उज्बेकिस्तान

उज्बेकिस्तान में स्थित ताश्कंद सरकारी प्राच्य विद्या संस्थान के दक्षिणी एशिया की भाषाओं के विभाग में हिन्दी भाषा का अध्यापन। इस विभाग के अंतर्गत महात्मा गाँधी भारतविद्या केंद्र का भी निर्देशन। कुछ वर्षों तक ताशकंद में स्थित लाल बहादुर शास्त्री नामक भारतीय सांस्कृतिक केंद्र में भी हिन्दी का अध्‍यापन। खाली समय में भारतीय फिल्मों का अनुवाद हिन्दी से उज्बेकी में। सम्प्रति - एसोसिएट प्रोफेसर, दक्षिणी एशिया की भाषाओं का विभाग, उजबेकिस्तान।

हु रुई, चीन

10 अक्टूबर 1983 को चीन में जनम। हिन्द विभाग अफ्रीका एवं एशिआई भाषा—संस्कृति विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर। भारतीय भाषा एंव संसकृति अध्ययन में स्नातकोत्तर। तुलनात्मक साहित्य अध्ययन केंद्र क्वान्ग्तोंग विदेशी भाषा विश्वविद्यालय चीन में कार्यरत।

डॉ. गेनादी श्लोम्पेर, तेल अवीव, इस्राइल

1954 में भूतपूर्व सोवियत संघ में जन्म। ताशकंद विश्व-विद्यालय से हिंदी-उर्दू-पंजाबी साहित्य में एम.ए.। ताश्कंद रेडियो के उर्दू विभाग में चार वर्षों तक अनुवादक रहे एवं तीन वर्ष स्कूल में उर्दू पढ़ाई। मॉस्को में हिंदी शिक्षक रहे। इज़राइल के दो विश्वविद्यालयों में हिंदी के कोर्स चलाए। यहीं से हिंदी व्याकरण में पीएच.डी. की। हिंदी पढ़ाने के लिये हिब्रू भाषा में अनेक पाठ्य-पुस्तकें लिखीं। टी.वी. समाचारों पर आधारित 'सनातन धर्म' तथा 'हिंदी कहानी का उद्गम और विकास' नामक कोर्स तैयार किये। हिंदी, उर्दू और पंजाबी से रूसी भाषा में अनेक कहानियों के अनुवाद प्रकाशित करवाये। सम्प्रति : तेल-अवीव विश्वविद्यालय के पूर्वी ऐशिया विभाग में कार्यरत।

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डॉ. लिउडमिला खोखलोवा, मास्को विश्वविद्यालय

मास्को राजकीय विश्वविद्यालय के अफ्रीका व एशिया अध्ययन संस्थान के भारतीय भाषाशास्त्र और साहित्य विभाग में सहायक प्रोफेसर। 1970 में मास्को राजकी विश्वविद्यालय से हिन्दी/उर्दू में एमए। 1974 में रूस की विज्ञान अकादमी के मास्को स्थित भाषाविज्ञान संस्थान से भारतीय भाषाविज्ञान में पीएच.डी की उपाधि। सम्प्रति : अफ्रीका और एशिया अध्ययन संस्थान, मास्को विश्वविद्यालय, मास्को, रूस।

प्रो. डॉ. तत्याना ओरान्स्कया, जर्मनी

हिन्दी एवं उर्दू भाषाओं की प्राध्यापिका। लेनिनग्राद/सैंट पीटर्सबर्ग राष्ट्रीय विश्वविद्यालय से भारत विद्या में स्नातकोत्तर। विभिन्न पदों पर शोध एवं एसोसिएट प्रोफेसर तथा विभागाध्यक्ष के रूप में अध्यापन का कार्य। 1986 में उसी विश्वविद्यालय से भाषा—शास्त्र (गैर—यूरोपीय भाषाएं) में पीएच.डी. की उपाधि दी गई। 1998 से 2016 तक वह हाम्बुर्ग विश्वविद्यालय, जर्मनी में आधुनिक भारत विज्ञान के क्षेत्र में प्रोफेसर। रूसी, हिन्दी, अंग्रेजी और जर्मन भाषाओं में प्रकाशित ग्रंथों, वैज्ञानिक लेखों, अनूदित रचनाओं तथा सन्दर्भ कार्यों की संख्या 100 से ज्यादा है। सम्प्रति — हिन्दी अध्यापन एवं जर्मनी में निवास।

डॉ॰ उपुल रंजीत हेवावितानगमगे, श्रीलंका

1985 में कॅलणिय विश्वविद्यालय से बी॰ए॰ (ऑनर्स) (हिन्दी) उपाधि प्राप्त की, 1997 में एम॰ फिल॰ (हिन्दी)। 1990 में लखनऊ स्थित भातखण्डे संगीत विद्यापीठ से वाद्य विशारद उपाधि। श्रीलंका के श्री जयवर्धनपुर विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर डिप्लोमा 'सर्जनात्मक लेखन और जनसंचार माध्यम' विषय पर प्राप्त की। वर्ष 2000 में सार्क छात्रवृत्ति परियोजना के अधीन नई दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यलय जाकर, प्रख्यात हिन्दी आलोचक प्रोफेसर मैनेजर पाण्डेय के निर्देशनानुसार 'जातक कथा एवं हिन्दी लोककथा' विषय पर एक तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत करते हुए पीएच॰डी॰ उपाधि हिन्दी में प्राप्त की। सम्प्रति - प्रोफेसर, हिन्दी अध्ययन विभाग, कॅलणिय विश्वविद्यालय, श्रीलंका।

प्रो. दरीगा कोकोएवा, कजाकिस्तान

19 अप्रैल 1979 को जन्म। अल-फराबी कजाख नेशनल यूनिवर्सिटी से दर्शनशास्त्र और राजनीति विज्ञान में विशेषता प्राप्त की तथा धार्मिक, दार्शनिक नृविज्ञान, दर्शन एवं संस्कृति में पी.एच.डी.। दिल्ली विश्वविद्यालय से हिन्दी भाषा का प्रशिक्षण। पिछले दस सालों से हिन्दी अध्यापन। मोनोग्राफ "हिंदू धर्म", "धर्म और समाज : आधुनिक प्रवचन", अध्ययन गाइड "हिंदू धर्म का इतिहास", "भारतीय भाषाशास्त्र का परिचय", "हिन्दी भाषा के वाक्यांश" एवं "हिंदी भाषा के समानार्थी" प्रकाशित। सम्प्रति - एसोसिएट प्रोफेसर, हिंदी शिक्षक, पूरवी फ़कलटी, अल-फराबी कजाख राष्ट्रीय विश्वविद्यालय, अल्माटी, कज़ाकिस्तान।

प्रो. सुब्रमनी, फीजी।

कार्यवाहक कुलपति, फीजी विश्वविद्यालय, फीजी फीजी विश्वविद्यालय में भाषा एवं साहित्य के प्रोफेसर, आधा दर्जन पुस्तकों के लेखक गिरमिटिया मजदूर के बेटे जो 1912 में केरल के एर्नाकुलम से फीजी पहुँचे।